top post

सितम्बर 2018 करेंट अफेयर्स




1. आयुष्मान भारत योजना: अन्य स्वास्थ्य योजनाओं से अलग कैसे?
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत हो चुकी है. अब इस योजना से गरीबों और वंचित तबकों का इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा. सरकार ने लोगों को इस खर्च के बोझ से बचाने के लिए इस स्कीम को शुरू किया है.

आयुष्मान भारत योजना:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत का शुभारंभ कर दिये है. इसे दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थकेयर स्कीम के तौर पर पेश किया जा रहा है. सरकार के मुताबिक आयुष्मान भारत योजना से करीब 50 करोड़ भारतीय लाभान्वित होंगे. 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 445 जिले के लोगों को योजना का लाभ मिलेगा.
इस योजना के दायरे में गरीब, वंचित ग्रामीण परिवार और शहरी श्रमिकों की पेशेवर श्रेणियों को रखा गया है. नवीनतम सामाजिक आर्थिक जातीय जनगणना (एसईसीसी) के हिसाब से गांवों के ऐसे 8.03 करोड़ और शहरों के 2.33 परिवारों को शामिल किया गया है. सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रत्येक परिवार को सालाना पांच लाख रुपये की कवरेज दी जाएगी और वे सरकारी या निजी अस्पताल में कैशलेस इलाज करा सकेंगे.इस योजना के तहत देश के 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा देने की योजना है, जिससे 66 लाख परिवारों को हर साल गरीबी रेखा के नीचे जाने से बचाया जा सकेगा. सरकार द्वारा प्रायोजित ये विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है. इस बीमा के अंतर्गत 1300 बीमारियों का इलाज संभव होगा. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के मुताबिक गरीबों के लिए सरकारी से लेकर निजी अस्पताल तक इलाज की व्यवस्था होगी जो कि पुरी तरह कैशलेस होगी. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत सारे सरकारी इंस्टीच्यूट जुड़े हैं. ऐसे में वहां इलाज कराना और आसान होगा. केरल में इस तरह कई अस्पतालों का कायाकल्प हो चुका है.
नमो केयर और मोदी केयर से विख्यात हो चुकी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के जन-जन तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचा सकेगी, ऐसा सरकारी तंत्र का दावा है.

आयुष्मान भारत योजना के दिशानिर्देश:
आयुष्मान भारत योजना के दिशानिर्देशों में स्पष्ट लिखा है कि आवेदन के दौरान किसी भी तरह का पहचान पत्र मान्य होगा. अगर किसी के पास आधार कार्ड नहीं है तो संबंधित राज्य सरकार किसी भी पहचान पत्र के जरिए उन्हें योजना का लाभ दे सकती है. इस योजना के तहत सामाजिक, आर्थिक और जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर पिछड़े और वंचित स्तर के लोगों की पहचान के लिए मानदंड तय किए गए हैं.

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना:
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना एक योजना है. इसका उद्देश्य देश के विभिन्न भागों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सभी के लिए सामान रूप से उपलब्ध करवाना है. इस योजना के अंतर्गत देश के पिछड़े राज्यों में चिकित्सा शिक्षा को बेहतर करने हेतु सुविधाएँ उपलब्ध करवाने का लक्ष्य निर्धारित है. इस योजना को मार्च 2006 में मंजूरी दी गई थी.प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की अवधि को 12वीं पंचवर्षीय योजना से बढ़ाकर 2019-20 तक कर दिया है और इस उद्देश्य के लिये 14,832 करोड़ रूपये का वित्तीय आवंटन निर्धारित किया है.
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्‍स), जैसे छह संस्‍थान, बिहार (पटना),मध्यप्रदेश (भोपाल),उड़ीसा (भुवनेश्‍वर) , राजस्‍थान (जोधपुर ),छत्तीसगढ़ (रायपुर) और उत्तरांचल (ऋषिकेश), प्रत्‍येक में एक-एक स्थापित करना है.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना:
गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के लिए एक केंद्र सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम शुरू किया हैं. इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबो को स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करना है बीपीएल श्रेणी से संबंधित श्रमिक और उनके परिवार के सदस्य इस योजना के तहत लाभार्थी होंगे. यह सुविधा सभी अस्पतालों (निजी और सरकारी) में होगी. इस योजना के लिए 1 अप्रैल 2008 को नामांकन शुरू किये गए जिसमे करीबन 36 लाख लोगो ने आवेदन किया हैं. यह योजना भारत के 25 राज्यों में लागू की गयी हैं.

राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन:
राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन राज्‍य सरकारों को लचीला वित्‍त पोषण उपलब्‍ध कराकर ग्रामीण और शहरी स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र को पुर्नजीवित करने का सरकार का स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम है. राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन में चार घटक शामिल हैं. जिनके नाम हैं- राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन, राष्‍ट्रीय शहरी स्‍वास्‍थ्‍य मिशन, तृतीयक देखभाल कार्यक्रम और स्‍वास्‍थ्‍य तथा चिकित्‍सा शिक्षा के लिए मानव संसाधन.
राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन प्रजनन और बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य से परे ध्‍यान केंद्रित कर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का विस्‍तार करने के सरकार के प्रयास को दर्शाता है. इसलिए इसके तहत संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों के दोहरे बोझ से निपटने के साथ ही जिला और उप जिला स्‍तर पर बुनियादी ढांचा सुविधाओं में सुधार किया गया है. राष्‍ट्रीय शहरी स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के बेहतर कार्यान्‍वयन के लिए राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन की सीख को राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन में समन्वित किया गया है. वर्ष 2017-18 के लिए राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के वास्‍ते 26,690 करोड़ रूपये आवंटित किए गए हैं, जो भारत सरकार की केंद्र प्रायोजित सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है.

 नीति आयोग के मुताबिक स्वास्थ्य पर खर्च:
नीति आयोग के मुताबिक भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद का महज 1.3 फीसदी ही स्वास्थ्य पर खर्च करता है. जबकि चीन 2.45 फीसदी खर्च करता है और श्रीलंका मलेशिया और थाइलैंड भी स्वास्थ्य पर भारत की तुलना में सकल घरेलू उत्पाद का दोगुना से ज्यादा खर्च करते हैं. ऐसे में गांव और शहर की अच्छी खासी आबादी को मजबूरीवश अपने घरेलु बजट में कटौती कर इलाज कराना पड़ता है और उन्हें अच्छी-खासी रकम उधार लेनी पड़ती है.

नोट: आयुष्मान भारत योजना को इन पांच राज्यों ने लागू करने से इन्कार कर दिया. ये राज्य तेलंगाना, ओडिशा, दिल्ली, केरल और पंजाब हैं. इन राज्यों का कहना है, की यह इस योजना से असंतुष्ट हैं.



2.  15 लाख कक्षाओं को डिजिटल बनाया जायेगा: प्रकाश जावड़ेकर
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा 23 सितंबर 2018 को राजस्थान मं  एक कार्यक्रम में घोषणा की गई कि कक्षाओं को डिजिटल बनाए जाने के लिए राष्ट्रव्यापी प्रयास आरंभ किये गये हैं.
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ‘ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड’ के तहत नौवीं से स्नातकोत्तर तक की 15 लाख कक्षाओं को डिजिटल कक्षा का रूप दिया जाएगा. इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और आमूल चूल परिवर्तन आएगा.

ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड
ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड के तहत सभी स्कूलों में अब सफेद ब्लैक बोर्ड लगाए जाएंगे. यह योजना पांच वर्षों में पूरी तरह लागू की जाएगी.  इससे देश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिलेगी.  इस योजना को केंद्र राज्य और नागरिक समुदाय तथा कार्पोरेट सामाजिक दायित्व से लागू किया जाएगा.  डिजिटल बोर्ड की कीमत में कमी लाने के प्रयास भी किये जायेंगे. महाराष्ट्र नागरिक सामुदाय ने छह जिलों में 300 करोड़ रुपए स्कूलों के लिए एकत्र किए हैं. यह उपक्रम सभी राज्यों में शुरू किया गया है.

पृष्ठभूमि
इससे पूर्व भारत में ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड चलाया गया था जिसे 1987 में आरंभ किया गया था. इस योजना का उद्देश्य प्राथमिक कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों की सुविधा के लिए आवश्यक संस्थागत उपकरण एवं सामग्रियां प्रदान करना निर्धारित किया गया है. इस योजना में उस स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक के लिए वेतन का प्रावधान है जहां लगातार दो वर्षों तक 100 से अधिक नामांकन आये हों. इस योजना को नौंवी पंचवर्षीय योजना के दौरान लागू किया गया था.


3.हांगकांग में स्वतंत्रता समर्थक राजनीतिक दल को प्रतिबंधित किया गया
हांगकांग प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा को आधार बताते हुए चीन से आजादी की समर्थक हांगकांग नेशनल पार्टी (एचएनपी) पर 24 सितंबर 2018 को प्रतिबंध लगा दिया है. हांगकांग के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी राजनीतिक दल पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया हो.
हांगकांग के सुरक्षा सचिव जॉन ली द्वारा जारी बयान के अनुसार, ‘दो वर्ष पुरानी हांगकांग नेशनल पार्टी किसी भी तरीके से हांगकांग की आजादी चाहती है. यह हांगकांग के संविधान जो चीन के साथ अपने संबंध को परिभाषित करता है, उसका उल्लंघन है. यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है.’
विदित हो कि ब्रिटेन ने 1997 में हांगकांग चीन को सौंपा था. उसके बाद से यह पहला मौका है जब किसी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाया गया है. ह्यूमन राइट्स वॉच द्वारा हांगकांग पर लगाए गये इस प्रतिबंध को लोगों की स्वतंत्रता पर सरकार का प्रहार बताया है. मानव अधिकार समूहों का मानना है कि चीन द्वारा हांगकांग पर इस प्रकार दबाव बनाना गलत है.हांगकांग प्रशासन द्वारा हांगकांग नेशनल पार्टी (एचएनपी) पर प्रतिबन्ध लगाए जाने के निम्नलिखित कारण बताए गये हैं:
एचएनपी का एजेंडा हांगकांग को एक अलग देश बनाना है, जो हांगकांग के संविधान से जुड़े मूल कानून का उल्लघंन है. इस पार्टी ने स्कूल, कॉलेज में घुसपैठ कर चीन के खिलाफ नफरत और घृणा फैलाने की कोशिश की है.  इस दल पर राष्ट्रीय और सार्वजनिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था और लोगों के अधिकार और स्वतंत्रता के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रतिबन्ध लगाया गया है.

हांगकांग का विवादित इतिहास
हांगकांग लगभग 200 छोटे-बड़े द्वीपों का समूह है और इसका शाब्दिक अर्थ है सुगंधित बंदरगाह. ब्रिटेन ने चीन के साथ व्यापार करने में हांगकांग को एक व्यावसायिक बंदरगाह की तरह इस्तेमाल किया. वर्ष 1941 के बाद लगभग चार वर्ष तक इस पर जापान का अधिकार रहा, किन्तु 1945 ब्रिटेन और चीनी सेना ने मिलकर जापान को हरा दिया.ब्रिटेन ने 1997 में हांगकांग की संप्रभुता कई शर्तों के साथ चीन को वापस सौंपी, जिसमे प्रमुख शर्त थी हांगकांग की पूँजीवादी व्यवस्था को बनाए रखना. चीन ने भी रक्षा व विदेश छोड़कर हांगकांग की प्रशासकीय व्यवस्था में हस्तक्षेप न करने का व पूँजीवादी व्यवस्था को आगामी 50 वर्षों तक न जस का तस रखने का आश्वासन दिया. लेकिन अब चीन अलग राह चुनता दिखाई दे रहा है जिसमें वह हांगकांग पर अधिक प्रभुत्व स्थापित करता जा रहा है.


4.वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में ग्रास नली विकसित करने में सफलता प्राप्त की
पहली बार वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में स्टेम कोशिकाओं (पीएससी) का उपयोग करके मानव ग्रास नली अथवा आहार नली के एक लघु कार्यात्मक संस्करण को विकसित करने में सफलता हासिल की है.
अमेरिका में सिनसिनाटी चिल्ड्रन सेंटर फॉर स्टेम सेल और ऑर्गनाइओड मेडिसिन (क्यूस्टॉम) में शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस प्रयोग से व्यक्तिगत परेशानियों से राहत मिल सकती है. इस सफलता से जीआई विकारों का इलाज करने के लिए नई पद्धति का प्रयोग किया जा सकता है.

लाभ
वैज्ञानिकों द्वारा कृत्रिम ग्रास नली के विकास से जन्मजात दोष जैसे एसोफेजियल एट्रेसिया, ईसीनोफिलिक एसोफैगिटिस और बैरेट मेटाप्लासिया आदि के इलाज में लाभ हो सकता है. इसके अतिरिक्त कृत्रिम रूप से विकसित इस नलिका को व्यक्तिगत रोगियों में ट्रांसप्लांट किया जा सकता है.

ग्रास नली
ग्रासनली (ओसोफैगस) लगभग 25 सेंटीमीटर लंबी एक संकरी पेशीय नली होती है जो मुख के पीछे गलकोष से आरंभ होती है, सीने से थोरेसिक डायफ़्राम से गुज़रती है और उदर स्थित हृदय द्वार पर जाकर समाप्त होती है. ग्रासनली, ग्रसनी से जुड़ी तथा नीचे आमाशय में खुलने वाली नली होती है. इसी नलिका से होकर भोजन आमाशय में पहुंच जाता है.
ग्रासनली के शीर्ष पर ऊतकों का एक प्रवेश द्वारा होता है जिसे एपिग्लॉटिस कहते हैं जो निगलने के दौरान के ऊपर बंद हो जाता है जिससे भोजन श्वासनली में प्रवेश न कर सके. चबाया गया भोजन इन्हीं पेशियों के क्रमाकुंचन के द्वारा ग्रासनली से होकर उदर तक पहुंच जाता है. ग्रासनली से भोजन को गुज़रने में केवल सात सेकंड लगते हैं और इस दौरान पाचन क्रिया नहीं होती.

स्टेम कोशिका क्या होता है?
स्टेम कोशिका (Stem Cell) ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जिनमें शरीर के किसी भी अंग को कोशिका के रूप में विकसित करने की क्षमता मिलती है. इसके साथ ही ये अन्य किसी भी प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती है. वैज्ञानिकों के अनुसार इन कोशिकाओं को शरीर की किसी भी कोशिका की मरम्मत के लिए प्रयोग किया जा सकता है. इस प्रकार यदि हृदय की कोशिकाएं खराब हो गईं, तो इनकी मरम्मत स्टेम कोशिका द्वारा की जा सकती है. इसी प्रकार यदि आंख की कॉर्निया की कोशिकाएं खराब हो जायें, तो उन्हें भी स्टेम कोशिकाओं द्वारा विकसित कर प्रत्यारोपित किया जा सकता है.

5. भारत में 10 लाख की आबादी पर केवल 19 जज: कानून मंत्रालय
कानून मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति दस लाख लोगों पर केवल 19 जज हैं. इन आंकड़ों में बताया गया है कि देश में 6000 से ज्यादा जजों की कमी है, जिनमें 5000 से ज्यादा जजों की निचली अदालतों में कमी है.यह आंकड़ा उस रिपोर्ट का हिस्सा है, जिसे संसद में चर्चा के लिए मार्च में तैयार किया गया था.

रिपोर्ट से संबंधित मुख्य तथ्य:
 रिपोर्ट के मुताबिक, अधीनस्थ अदालतों में 5748 न्यायिक अधिकारियों की कमी है और 24 उच्च न्यायालयों में 406 वैकेंसी हैं. निचली अदालतों में फिलहाल केवल 16,726 न्यायिक अधिकारी हैं, जबकि वहां 22,474 न्यायिक अधिकारी होने चाहिए थे. उच्च न्यायालयों में जजों की मान्य संख्या 1079 हैं, जबकि वहां केवल 673 जज हैं.
 सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 31 हैं और वहां छह पद खाली हैं. इसी तरह सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और निचली अदालतों में जजों के 6160 पद खाली हैं.

जजों की कमी का मामला:
जजों की कमी का मामला अप्रैल 2016 में उस समय सुर्खियों में आया था जब तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने जजों की नियुक्ति में सरकार की 'निष्क्रियता' की बात कही थी. उन्होंने मुकदमों के अंबार के निपटने के लिए जजों की संख्या 21,000 से बढ़ाकर 40,000 करने की बात कही थी.  उन्होंने इसके साथ ही कहा था कि 1987 से कुछ नहीं बदला है, जब विधि आयोग ने जजों की संख्या प्रति 10 लाख आबादी पर 10 जजों से बढ़ाकर 50 करने की सिफारिश की थी.
लेकिन बाद में सरकार ने स्पष्ट किया था कि विधि आयोग ने यह भी टिप्पणी की थी कि मुकदमे दाखिल करने की संख्या आर्थिक और सामाजिक स्थितियों से जुड़ी है, जो विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग है.
केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने हाल ही में देश के सभी 24 हाई कोर्टों के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर निचली अदालतों में जजों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने का आग्रह किया था. कानून मंत्री ने 14 अगस्त के पत्र में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में 2,76,74,499 मुकदमों के लंबित होने का जिक्र करते हुए कहा था कि इसका एक कारण जजों की कमी भी है


6. सिक्किम को मिला पहला एयरपोर्ट, जानिए इससे जुड़ी 10 मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 24 सितम्बर 2018 को सिक्किम के पाक्योंग में बने राज्य के पहले हवाई अड्डे का उद्घाटन किया. विकास भारत के पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है.यह एयरपोर्ट राजधानी गंगटोक से करीब 33 किलोमीटर की दूरी पर है. इस एयरपोर्ट के बन जाने से इस राज्य के पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. चीन की सीमा से लगते इस एयरपोर्ट को काफी अहम माना जा रहा है.

उद्देश्य:
इस योजना का उद्देश्य लोगों को सस्ते में हवाई सफर उपलब्ध कराना और दूर-दराज के इलाकों को भी हवाई संचालन से जोड़ना है.

शीर्ष दस मुख्य तथ्य:
स्थान: हवाई अड्डा 201 एकड़ में फैला हुआ है और पाक्योंग ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा 4500 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है.सामरिक स्थान: यह भारत-चीन सीमा से करीब 60 किमी और सिक्किम की राजधानी गंगटोक से लगभग 30 किमी दूर है.सामरिक प्रासंगिकता: यह एयरपोर्ट सिक्किम के लोगों का जीवन आसान कर देगा. सरकार की कोशिश है कि इस एयरपोर्ट से आना-जाना सामान्य लोगों की पहुंच में रहे, इसलिए इसे उड़ान योजना से जोड़ा गया. आने वाले दिनों में मुख्य रनवे के बगल में 75 मीटर लंबी एक अन्य पट्टी के निर्माण के बाद भारतीय वायुसेना इस हवाई अड्डे पर विभिन्न प्रकार के विमान उतार सकेगी.रनवे चौड़ाई: एयरपोर्ट का रनवे 1.75 मीटर का है, जिसकी चौड़ाई 30 मीटर है.व्यय: पाक्योंग हवाई अड्डे का निर्माण लगभग 605 करोड़ रुपये में हुआ है.यात्रा का समय: इस हवाई अड्डे से उड़ानों के परिचालन की शुरुआत से पर्यटकों को निकटतम बागडोगरा हवाई अड्डे से उतरने के बाद चार-पांच घंटे का मुश्किल भरा सफर नहीं करना पड़ेगा. इस एयरपोर्ट के बन जाने के कारण पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों के लिए भी यह सफर से कम से कम 4-5 घंटे बचाएगा.
यात्री क्षमता: इसके 1.75 मीटर लंबे रनवे के साथ 116 मीटर का टैक्सीवे है, जिससे इस हवाई पट्टी पर एक ही समय में दो विमान उतारे जा सकते हैं. एयरपोर्ट की क्षमता सौ यात्रियों की है.
कनेक्टिविटी: इस एयरपोर्ट के बनने से सिक्किम के टूरिज्म, आर्थिक विकास को बल मिलेगा. सिक्किम अकेला ऐसा राज्य था, जिसके पास अपना कोई एयरपोर्ट भी नहीं था. अब इस राज्य के पास भी अपना एयरपोर्ट हो गया. इसके साथ ही सिक्किम की कनेक्टिविटी देश के सभी शहरों के साथ मजबूत हो गई है.
इंजीनियरिंग का चमत्कार: हवाई अड्डे के निर्माण में अत्याधुनिक जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया गया है. यहां की मिट्टी में एयरपोर्ट की आवश्यकताओं के हिसाब से बदलाव किए गए हैं. 4,500 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर बना यह हवाई अड्डा इंजीनियरिंग का चमत्कार कहा जा रहा है.
पर्यटन: प्राकृतिक हरे-भरे पौधों, जंगलों, दर्शनीय घाटियों, पर्वतमालाओं और भव्य सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध सिक्किम पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा जगह है. यहां पर हवाई सेवा न होने के कारण पर्यटकों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. अब पर्यटकों और आम नागरिकों को काफी फायदा पहुंचेगा. राज्य में पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होगा, जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा. इस हवाई अड्डे से पहाड़ों की वादियां नजर आएंगी जो एक रोमांचकारी एहसास होगा.

अन्य जानकारी:
पाक्योंग हवाई अड्डा देश का 100वां हवाई अड्डा है. अगले महीने से लोग सीधे सिक्किम के लिए उड़ान भर सकेंगे. स्पाइसजेट एयरलाइन सबसे पहली उड़ान को अंजाम देगी. विमान चार अक्टूबर को कोलकाता से उड़ान भरेगा.पाक्योंग हवाई अड्डा केंद्र सरकार की ‘उड़ान’ (उड़े देश का आम नागरिक) योजना में शामिल है. इसका निर्माण भारतीय एयरपोर्ट अथॉरिटी(एएआई) ने किया है. ये एयरपोर्ट चीन सीमा के सबसे करीब है, लिहाजा भारत के लिए रणनीतिक तौर पर भी काफी काम आएगा.
स्पाइसजेट ने इसी साल 10 मार्च को कोलकाता से पाक्योंग के बीच बॉम्बार्डियर Q400 जहाज की सफल टेस्ट फ्लाइट की थी. इसके बाद कंपनी को सिक्यॉरिटी क्लियरेंस मिल गया था. हाल ही में भारतीय वायुसेना का एक डोर्नियर 228 इस हवाई अड्डे पर ट्रायल के तौर पर उतारा गया था.

पृष्ठभूमि:
इस हवाई अड्डे की आधारशिला वर्ष 2009 में रखी गई थी. यहां से परिचालन शुरू होने के साथ ही सिक्किम पूरे देश से सीधे तौर पर जुड़ जाएगा. यह एयरपोर्ट सिक्किम के लोगों का जीवन आसान कर देगा. इस योजना के तहत एक घंटे तक के सफर के लिए सिर्फ 2500-2600 रुपये ही देने होते हैं. सरकार के इस विजन के तहत हवाई यात्रा का किराया, रेलवे के सफर के किराए के बराबर हो गया है.
यह एयरपोर्ट 206 एकड़ में फैला है. सिक्किम के इस एयरपोर्ट में यात्रियों की सुविधाओं के मद्देनजर महत्वपूर्ण इंतजाम किए गए हैं. वादियों के बीच होने के कारण यह लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है.

7.दिल्ली आईजीआई एयरपोर्ट विश्व का 16वां सबसे व्यस्त एयरपोर्ट: रिपोर्ट
एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनैशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट पर 6.34 करोड़ यात्रियों की आवाजाही रही जिससे यह दुनिया का 16वां सबसे व्यस्त एयरपोर्ट बन गया.यात्रियों की आवाजाही की संख्या के लिहाज से आईजीआई हवाई अड्डे ने शीर्ष 20 व्यस्त हवाई अड्डों की सूची में 16वें पायदान पर जगह बनाई है.

रिपोर्ट से संबंधित मुख्य तथ्य:
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले 14 प्रतिशत अधिक यात्रियों की आवाजाही हुई और वर्ष 2016 में 22वें पायदान से उछलकर यह 16वें पायदान पर आ गया. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत दुनिया में सबसे तेज बढ़ने वाला एविएशन मार्केट है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 10.39 करोड़ यात्रियों के साथ अटलांटा का हटर्सफील्ड जैक्सन हवाई अड्डा बीते साल दुनिया का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा रहा. इसके बाद 9.58 करोड़ यात्रियों के आवागमन के साथ बीजिंग हवाई अड्डा दूसरे स्थान पर रहा. दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (8.82 करोड़ यात्री) तीसरे, तोक्यो हवाई अड्डा (8.54 करोड़ यात्री) चौथे और लॉस एंजलिस (8.45 करोड़ यात्री) पांचवें स्थान पर रहा. एसीआई हवाई अड्डों का वैश्विक निकाय है, जिसके दायरे में 174 देशों के 1,751 हवाई अड्डे आते हैं.

एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल:
एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल दुनियाभर के एयरपोर्ट का एसोसिएशन है जो अभी 641 सदस्यों के साथ काम कर रहा है. इसके अंतर्गत 1953 एयरपोर्ट और 176 देश आते हैं. जारी किए गए रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2017 में दुनियाभर में हवाई सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में 5.2 फीसदी की वृद्धि हुई.
इसका उद्देश्य आम जनता को हवाई परिवहन प्रणाली के साथ सुरक्षित, कुशल और पर्यावरण की दृष्टि से उत्तम सुविधाएं प्रदान करना है. एसीआई हवाई सेवा गुणवत्ता के आधार पर हर साल विश्व भर के हवाई अड्डों की रैंकिंग करती है.

8.भारत ने इंटरसेप्टर मिसाइल का सफल परीक्षण किया
भारत ने 23 सितंबर 2018 को ओडिशा के मिसाइल परीक्षण केन्द्र से इंटरसेप्टर मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. इसके साथ ही भारत ने दो परतों वाली बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है.इंटरसेप्टर मिसाइल को अब्दुल कलाम द्वीप से रात में आठ बजकर पांच मिनट पर प्रक्षेपित किया गया. इसे पहले व्हीलर द्वीप के नाम से जाना जाता था. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक ने कहा कि यह पृथ्वी रक्षा यान (पीडीवी) मिशन पृथ्वी के वायुमंडल मं  50 किमी से ऊपर की ऊंचाई पर लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए है.

इंटरसेप्टर मिसाइल की मुख्य विशेषताएं
परीक्षण के उपरांत कुछ समय बाद पृथ्वी रक्षा यान (पीडीवी) इंटरसेप्टर और लक्ष्य मिसाइल दोनों सफलतापूर्वक जुड़ गए थे.  पीडीवी मिशन पृथ्वी के वायुमंडल में 50 किलोमीटर से ऊपर की ऊंचाई पर लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए है.   इस तकनीक को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है. परीक्षण के दौरान राडार से आ रहे आंकड़ों का कंप्यूटर नेटवर्क ने सटीक विश्लेषण किया और आने वाली लक्ष्य मिसाइल को मार गिराया गया.  सूत्रों के मुताबिक इंटरसेप्टर मिसाइल उच्च दक्षता वाले इंट्रियल नेविगेशन प्रणाली (आईएनएस) से निर्देशित हुई.  इससे पूर्व 11 फरवरी 2017 को इसी स्थान से इंटरसेप्टर का परीक्षण किया गया था.
भारत में ही बनने वाली इस इंटरसेप्टर मिसाइल के अलावा कई और मिसाइल भी पहले सफलतापूर्वक जांची जा चुकी है. इससे पहले डीआरडीओ ने जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल ‘प्रहार’ को टेस्ट किया था. ‘प्रहार’ पूरी तरह से स्वदेशी अत्याधुनिक मिसाइल है. भारतीय सेना में ‘प्रहार’ जैसी मिसाइल के शामिल होने से सेना की मारक क्षमता में इजाफा होगा साथ ही यह युद्ध प्रणाली के लिए ज़रूरी अल्ट्रा-मॉर्डन टेक्नोलॉजी को भी बढ़ाने में सक्षम है. इंटरसेप्टर का नाम पृथ्वी डिफेंस व्हीकल (पीडीवी) मिशन दिया गया.


9.तमिलनाडु सरकार द्वारा नीलकुरिंजी पौधे के संरक्षण की घोषणा
तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में नीलकुरिंजी नामक पौधे के संरक्षण के लिए योजना की घोषणा की है. यह पौधा बारह वर्षों में एक बार खिलता है. हाल ही में सरकार को इस पौधे के फूलों की व्यापारिक बिक्री की शिकायतें मिली थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया.
नीलकुरिंजी पौधा
 यह एक किस्म का उष्णकटिबंधीय पौधा है. यह पौधा पश्चिमी घाट के शोला वन में पाया जाता है. पूर्वी घाट में यह पौधा शेवरॉय पहाड़ियों में पाया जाता है.  यह पौधा केरल में अनामलाई हिल्स और अगाली हिल्स तथा कर्नाटक के संदुरु हिल्स में पाया जाता है.  इस पौधे की लम्बाई 30 से 60 सेंटीमीटर होती है. यह पौधा 1300 से 2400 मीटर की ऊंचाई वाले स्थानों पर उगता है.  नीलकुरिंजी के फूल बैंगनी-नीले रंग के होते हैं. इसमें 12 वर्षों में एक बार ही फूल खिलते हैं. इन फूलों के कारण ही पश्चिमी घाट की नीलगिरी पहाड़ियों को नीला पर्वत कहा जाता है.  इसे दुर्लभ किस्म का पौधा घोषित किया गया है. यह पश्चिम घाट के अतिरिक्त विश्व के किसी दूसरे हिस्से में नहीं उगता. यह पौधा संकटग्रस्त पौधों की प्रजाति में शामिल है.

पौध-संरक्षण क्या होता है?
फसल-उत्पादन के लक्ष्य हासिल करने में पौध-संरक्षण की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. पौध संरक्षण के महत्वपूर्ण घटकों में समन्वित कीट प्रबंधन को प्रोत्साहन, फसल पैदावार को कीटों और बीमारियों के दुष्प्रभाव से बचाने के‍ लिए सुरक्षित और गुणवत्तायुक्त कीटनाशकों की उपलब्धता सु‍निश्चित करना, ज्या‍दा पैदावार देने वाली नई फसल प्रजातियों को तेजी से अपनाए जाने के लिए संगरोधन (क्वारन्टीन) उपायों को सुचारू बनाना शामिल है. इसके अंतर्गत बाहरी कीटों के प्रवेश की गुंजाइश समाप्त करना और पौध-संरक्षण कौशल में महिलाओं को अधिकारिता प्रदान करने सहित मानव संसाधन विकास पर भी ध्यान दिया जाता है.


10.जापान ने पृथ्वी से 30 करोड़ किमी दूर ऐस्टेरॉयड पर उतारे दो रोबोट रोवर
जापानी एरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए) के मुताबिक, पृथ्वी से 30 करोड़ किलोमीटर दूर स्थित 'रोइगु' ऐस्टेरॉयड पर उसने सफलतापूर्वक दो रोबोट रोवर उतार लिए हैं. रोवर्स को सामूहिक रूप से MINIRVA कहा जा रहा है.जापानी अंतरिक्ष एजेंसी ने एक एस्टेरॉयड पर दो मानव रहित रोवर्स की सफलतापूर्वक लैंडिंग करके इतिहास बना दिया है. 22 सितम्बर 2018 को जापान के हेवसुसा 2 अंतरिक्ष यान से अलग होकर ये रोवर्स एस्टेरॉयड की सतह पर उतरे थे.जेएएक्सए ने बताया की किसी भी ऐस्टेरॉयड की सतह पर यह दुनिया का पहला चलता हुआ रोबोटिक ऑब्ज़र्वेशन है. सही से काम कर रहे दोनों रोवर ने रोइगु की सतह का सर्वे करना शुरू कर दिया है.हेवसुसा-2 यान ने 20 सितम्बर 2018 को लगभग 20 किमी की कक्षा ऊंचाई से एस्टेरॉयड रोइगु के लिए लैंड करना शुरू किया था.हेवसुसा-2 यान रोइगु से दिसंबर 2019 में वापस धरती के लिए रवाना होगा और वर्ष 2020 के अंत तक यहां पहुंच जाएगा. यह यान अपने साथ क्षुद्रग्रह से जुटाए गए कुछ सैंपल भी लेकर आएगा.
अगर अंतरिक्ष यान की वापसी सफल रही तो यह "सी-टाइप के एस्टेरॉयड से दुनिया का पहला नमूना रिटर्न मिशन होगा.

रोवर्स ने पहली तस्वीर भेजा:
रोवर्स ने अपने पहले चरण की तस्वीरों में एक किमी चौड़ी अंतरिक्ष की चट्टान की तस्वीरें ली हैं. हीरे की तरह दिखने वाली इस चट्टानिक एस्टेरॉयड पर पानी और कार्बनिक पदार्थों के समृद्ध भंडार होने की उम्मीद है. वैज्ञानिकों को इस तस्वीर से "पृथ्वी के निर्माण खंडों और इसके महासागरों और जीवन के विकास के क्रम को स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलेगी.

रोबोट रोवर का डिज़ाइन:
विशेष रूप से डिज़ाइन किए पहले रोवर पर चार और दूसरे पर तीन कैमरे लगाए गए हैं. दोनों रोवर्स तापमान गेज और ऑप्टिकल सेंसर के साथ-साथ एक्सेलेरोमीटर और जीरोस्कोप के साथ लैस हैं.

रोवर:

रोवर ऐसे वाहन को कहते हैं जो किसी अन्य ग्रह या खगोलीय वस्तु पर घूमने-फिरने की क्षमता रखता हो. कुछ रोवर रोबोट होते हैं और बिना किसी व्यक्ति की मौजूदगी के चलते हैं और कुछ मनुष्यों को स्थान-से-स्थान ले जाने के लिए बने होते हैं. आम तौर पर रोवर किसी ग्रह पर किसी अन्य यान के अन्दर ले जाए जाते हैं जो उस ग्रह की सतह पर उतरता हो.





No comments