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February current affairs || फरवरी करेंट अफेयर्स।।

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February current affairs || फरवरी करेंट अफेयर्स।।


सुप्रीम कोर्ट में रोस्टर सिस्टम लागू-

भारत के प्रधान न्यायाधीश के आदेश के तहत अधिसूचित किया गया यह रोस्टर सिस्टम पांच फरवरी से प्रभावी होगा. अधिसूचना में चीफ जस्टिस और 11 अन्य जजों की अध्यक्षता वाली पीठ के पास मामलों का बंटवारा किया गया है. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ नई जनहित याचिकाओं, चुनाव मसलों, न्यायालय की अवमानना, सामाजिक न्याय आदि मसलों पर सुनवाई करेगी.

छत्तीसगढ़ के पहले राज्यपाल दिनेश नंदन का निधन-

छत्तीसगढ़ के पहले राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय का लंबी बीमारी के कारण निधन हो गया।वह 2000 से 2003 तक छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रहे. उनका जन्म 2 फरवरी 1936 को हुआ था। वह छत्तीसगढ़ के अलावे त्रिपुरा के भी राज्यपाल रह चुके थे. वे वर्ष 1960 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए और उन्होंने बिहार राज्य के डीजीपी के रूप में भी कार्य किया.


मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद बरी-
मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को आतंकवाद के आरोपों से बरी कर दिया और सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब लंदन में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे नशीद और उनके समर्थकों की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है.

सभी ट्रेनों में लगेंगे सीसीटीवी और वाई-फाई,-
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने वर्ष 2018-19 का बजट पेश करते हुए घोषणा की कि जल्द सभी ट्रेनों में सीसीटीवी और वाई-फाई लगेंगे और 4000 बिना क्रॉसिंग वाले फाटक खत्म होंगे. साथ ही यह भी घोषणा की गयी कि मुंबई लोकल पर 1100 करोड़ रूपये खर्च किए जाएंगे और 90 किलोमीटर पटरी का विस्तार होगा.

मगही भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार शेष आनंद मधुकर को 1 फरवरी 2018 को साहित्य अकादमी के भाषा सम्मान से सम्मानित किया गया. आनंद मधुकर को वर्ष 2016 के लिए यह पुरस्कार दिया गया.

यह सम्मान साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी द्वारा प्रदान किया गया. भाषा सम्मान स्वरूप उन्हें एक स्मृतिफलक, अंगवस्त्रम एवं एक लाख रुपए की धनराशि प्रदान की गई.

शेष आनंद मधुकर-

•    शेष आनंद मधुकर का जन्म बिहार के ग्राम दरियापुर, थाना टिकारी, गया (बिहार) में 8 दिसंबर 1939 को हुआ था. 

•    उन्होंने वर्ष 1960 में साहित्य क्षेत्र में कदम रखा एवं उस समय से वे इस क्षेत्र में कार्यरत हैं.

•    उनकी कविताएं हिंदी की प्रसिद्ध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं.

•    शेष आनंद मधुकर ने मगही भाषा के विकास हेतु व्यापक कार्य किए हैं. 

•    उनकी मगही और हिंदी में पांच से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं. 

•    शेष आनंद मधुकर ने मगही भाषा में विभिन्न विधाओं में अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं हैं.

•    उनकी प्रसिद्ध हिंदी रचनाओं में एकलव्य, मगही कविता के बिम्ब तथा भगवान बिरसा शामिल हैं.



भाषा सम्मान--

यह उन भाषाओं में साहित्यिक कार्यों को सम्मान डेटा है जो देश के विभिन्न हिस्सों में समान रूप से बोली जाती हैं. यह सम्मान साहित्य अकादमी पुरस्कारों के लिए मान्यता प्राप्त 24 क्षेत्रीय भाषाओं में से नहीं दिया जाता. यह सम्मान अन्य भाषाओँ के महत्व को दर्शाने तथा उन भाषाओँ के लेखकों को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से दिया जाता है. इसमें पुरस्कार स्वरुप एक लाख रुपये तथा स्मृतिफलक दिया जाता है.

मगही भाषा--

मगही अथवा मगधी भाषा भारत के मध्य पूर्व में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा है. इसका निकट संबंध भोजपुरी और मैथिली भाषा से है और अक्सर ये भाषाएँ एक ही साथ बिहारी भाषा के रूप में पहचानी जाती हैं. इसे देवनागरी लिपि में लिखा जाता है. मगही बोलनेवालों की संख्या वर्ष 2002 में लगभग 1 करोड़ 30 लाख आंकी गयी थी. यह मुख्य रूप से यह बिहार के गया, पटना, राजगीर, नालंदा, जहानाबाद, अरवल, नवादा और औरंगाबाद के इलाकों में बोली जाती है.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे इस्पात उत्पादक देश बन गया है. उसने कच्चे इस्पात उत्पादन के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. विश्व इस्पात संघ (डब्ल्यूएसए) की रिपोर्ट में यह बात कही गई.

इस्पात उत्पादक से संबंधित मुख्य तथ्य:-

•    चालू साल के पहले दो माह में भारत का इस्पात उत्पादन 1.45 करोड़ टन रहा है. भारत पिछले पांच साल से इस्पात उत्पादन में चीन, जापान और अमेरिका के बाद चौथे स्थान पर चल रहा था.

•    विश्व इस्पात संघ (डब्ल्यूएसए) के आंकड़ों के अनुसार जनवरी-फरवरी में भारत की इस्पात उत्पादन की वृद्धि दर सबसे अधिक यानी 7.6 प्रतिशत रही. इस दौरान वैश्विक वृद्धि सिर्फ 0.6 प्रतिशत रही. वैश्विक उत्पादन 12.76 करोड़ टन रहा.

•    चीन 2017 में 83.17 करोड़ टन इस्पात उत्पादन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश बना हुआ है. इसके पिछले साल उसका इस्पात उत्पादन 78.69 करोड़ टन था. इस दौरान 5.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.


•    जापान विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है. हालांकि उसका इस्पात उत्पादन 2016 के 10.48 करोड़ टन से गिरकर 2017 में 10.47 करोड़ टन रह गया है. जापान के इस्पात उत्पादन में 0.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

•    अमेरिका वर्ष 2010 से लगातार इस्पात उत्पादन में तीसरे स्थान पर बना हुआ था. जनवरी-फरवरी में अमेरिका का इस्पात उत्पादन 1.35 करोड़ टन रहा.

पृष्ठभूमि:-

भारत सरकार विभिन्नम नीतिगत उपायों से इस्पा त उद्योग की क्षमता बढाने का प्रयास कर रही है. कच्चे  माल के प्रतिभूतिकरण की आवश्य कता, प्रभावी और कम लागत की प्रचालन व्य वस्थाक तथा इस्पारत के निर्माण में अत्यारधुनिक प्रौद्योगिकी लागू करने पर भी जोर दिया जा रहा है. भारत अब इस्पात उत्पादक के मामले में दूसरे स्थान के लिए जापान को कड़ी टक्कर दे रहा है.

बजट 2018 में महिलाओं के लिए की गयी प्रमुख घोषणाएं-

•    उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जायेंगे. इस योजना से यह स्पष्ट होता है कि सरकार का ध्यान महिला सशक्तिकरण की ओर भी है. ग्रामीण एवं निर्धन परिवेश में रह रहीं महिलाओं को लकड़ी के धुएं तथा पारंपरिक ईंधन के स्रोतों की अपेक्षा गैस कनेक्शन देने से न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार आयेगा बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

•    सरकार महिला कर्मचारियों के ईपीएफ में 3 साल तक 8% का योगदान करेगी. वहीं, बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देने वाले क्षेत्रों में ईपीएफ में सरकार का योगदान 12% रहेगा. इससे पहली बार नौकरी ज्वाइन करने वाली महिलाओं को अधिक वेतन प्राप्त होगा. इस घोषणा से महिलाओं को रोजगार की ओर प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी तथा अधिक नौकरियों का सृजन होगा.

•    मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया. बजट 2018 भाषण में वित्त मंत्री द्वारा की गई एक अन्य अहम घोषणा के अनुसार महिलाओं को नवजात शिशु की देखभाल करने के लिए दिए जाने वाले मातृत्व अवकाश को बढ़ाया गया है. इससे महिलाओं तथा उनके परिवारों का नौकरियों की ओर रुझान बढ़ेगा.

23 जनवरी 2018 को विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की 48 वीं वार्षिक बैठक स्विट्जरलैंड के दावोस में शुरू हुई. भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन भाषण दिया. उद्घाटन भाषण देने के साथ साथ नरेंद्र मोदी पिछले दो दशको से विश्व आर्थिक मंच की  बैठक में भाग लेने वाले पहले भारतीय प्रधान मंत्री हैं. इससे पूर्व 1997 में हुई इसकी बैठक में भारतीय प्रधान मंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने भाग लिया था.

इसके 4 दिवसीय बैठक में 100 से अधिक भारतीय सहित शीर्ष वैश्विक कंपनियों के 2000 से अधिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ),राज्यों और सरकारों के 70 प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लगभग 45 प्रमुख ने हिस्सा लिया.
मोदी के अलावा, अरुण जेटली, पीयूष गोयल और सुरेश प्रभु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों सहित छह केंद्रीय मंत्रियों सहित रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने इस बैठक में हिस्सा लिया.


प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु- 


• 40 मिनट के अपने लंबे भाषण में  भारतीय प्रधान मंत्री ने दुनिया के समक्ष तीन प्रमुख चुनौतियों, जैसे जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और संरक्षणवाद को सूचीबद्ध किया.

• पिछले 20 वर्षों में  भारतीय अर्थव्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन देखा गया है. 1997 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद 400 अरब डॉलर था. इसकी वर्तमान जीडीपी 2.3 खरब डॉलर से अधिक है.
• मोदी ने वैश्विक एकता,शांति और पर्यावरण की सुरक्षा की मांग करने वाली सदियों पुरानी भारतीय सभ्यता पर पुनः प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का सामाजिक दर्शन विश्व आर्थिक मंच 2018 की वार्षिक बैठक के मुख्य विषय “एक खंडित दुनिया में एक साझा भविष्य बनाना” को प्रतिध्वनित करता है.

• मोदी ने अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए भारत द्वारा किये गए कुछ महत्वपूर्ण आर्थिक प्रयास जैसे कि जन धन योजना, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन आदि को सूचीबद्ध किया. उन्होंने भारत की विकास कर रही अर्थव्यवस्था से लाभ उठाने के लिए कॉर्पोरेट नेताओं को भारत आने के लिए आमंत्रित किया.
दावोस में प्रदर्शन पर भारत का नरम रुख

• 129 प्रतिनिधियों के साथ, संयुक्त राज्य अमेरिका (780), ब्रिटेन (266) और स्विट्जरलैंड (233 प्रतिभागियों) के बाद भारत की उपस्थिति चौथी सबसे बड़ी उपस्थिति थी .

• डब्ल्यूईएफ और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने चौथे औद्योगिक क्रांति (सी 4 आईआर) के लिए एक केंद्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की. इसका केंद्र मुंबई में स्थापित किया जाएगा और चौथे औद्योगिक क्रांति के तहत मौजूदा विश्व आर्थिक मंच के सेंटर सैन फ्रांसिस्को से इसके सिस्टर  केंद्र के रूप में संचालित होगा.प्रस्तावित सेंटर भारतीय नीति निर्माताओं और विचारकों को प्रशासन और नई प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों में अनूठी अंतर्दृष्टि के जरिये तीव्रता से विश्व स्तर पर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के आविष्कारों के साथ संबंध स्थापित करने और आगे बढ़ने की अनुमति देगा.

• भारत के दो योग शिक्षक दावोस में तीन दिनों तक कक्षाएं आयोजित करेंगे. कक्षाओं में राज्य और सरकार के 70 प्रमुखों, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प सहित शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों की प्रमुख हस्तियां और बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल होंगें.

• केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने दावोस में भारतीय व्यंजनों को बढ़ावा देने के लिए विशेष उपाय किए.

• बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान ने एसिड हमले के शिकार लोगों के लिए किये गए अपने काम के लिए डब्लूईएफ का क्रिस्टल पुरस्कार प्राप्त किया. उन्हें, अपने मीर फाउंडेशन के माध्यम से एसिड हमले के शिकार लोगों के पुनर्वास हेतु प्रयासरत सर एल्टन जॉन और केट ब्लैंचेट सहित संयुक्त रूप से मानवतावादी पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

भारत को लाभ-

भारत, विश्व आर्थिक मंच के इस बैठक में प्रतिनिधियों को अपनी बढ़ते आर्थिक कौशल के प्रदर्शन के साथ साथ नरम रुख अपना रहा है. परिणामस्वरूप, भारत के लिए निम्नलिखित तरीकों से लाभ की उम्मीद की जा सकती है.

• अपने मुख्य भाषण में  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बिजनेस स्थितियों में सुगमता लाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को सूचीबद्ध किया. सरकार द्वारा पेश किए गए सकारात्मक निवेश के माहौल से विदेशी निवेश में वृद्धि की उम्मीद है.

• भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी से लाभ होने की संभावना है. योग की भूमि के रूप में भारत के कल्याण पर्यटन को निकट भविष्य में बढ़ावा मिलेगा.

• भारत के प्रौद्योगिकी कौशल को दावोस में वैश्विक समुदाय के समक्ष दिखाया गया था. उम्मीद की जा रही है कि उभरती हुई प्रौद्योगिकियों जैसे इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स, ब्लॉकचेन और बड़े डेटा जैसे इंटरनेट और विदेशी कंपनियों के बीच भागीदारी बढ़ेगी.

निष्कर्ष-

पिछले दस वर्षों में  भारतीय अर्थव्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन आया है. पूरे देश में आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल को अपनाया गया था. निस्संदेह, 21 वीं सदी में पीपीपी मॉडल की प्रासंगिकता के विषय को भारतीय राजनीतिक और कॉरपोरेट नेतृत्व को समझाने में विश्व आर्थिक मंच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. विश्व आर्थिक मंच की बैठक में नरेंद्र मोदी की उपस्थिति से भारत और विश्व आर्थिक मंच की साझेदारी अगले स्तर पर पहुंच गई है.

ब्रिटेन के मीडिया संस्थान 'द इकोनॉमिस्ट' द्वारा तैयार किए गए 'वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक' में भारत पिछले वर्ष के मुकाबले 10 स्थान खिसककर 42वें पायदान पर रहा है. पिछले साल भारत इस सूचकांक में 32वें स्थान पर था.

वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक से संबंधित मुख्य तथ्य:


•    इस सूचकांक में 165 स्वतंत्र देशों को शामिल किया गया है. भारत का कुल स्कोर 7.23 अंक तक गिर गया है, जबकि चुनावी प्रक्रिया (9.17) पर भारत का अच्छा प्रदर्शन है.

•    यह अन्य चार मापदंडों- राजनीतिक संस्कृति, सरकार का कामकाज, राजनीतिक भागीदारी और नागरिक स्वतंत्रता पर इतना अच्छा स्कोर करने में कामयाब नहीं हुआ है.

•    इस सूची को चार व्यापक श्रेणियों - पूर्ण लोकतंत्र, अपूर्ण लोकतंत्र, संकर शासन और सत्तावादी शासन में बांटा गया है.



•    अमेरिका को 21 वीं रैंक, जापान, इटली, फ्रांस, इज़राइल, सिंगापुर और हांगकांग को 'अपूर्ण लोकतंत्र' के नाम पर रखा गया है.

•    इस सूची में चीन 139वें स्थान पर है जबकि म्यांमार 120वें, रूस 135वें और वियतनाम 140वें स्थान पर है. इस सूची में उत्तर कोरिया को सबसे निचला 167वां स्थान ‌मिला है.

•    इस सूचकांक में नॉर्वे फिर से शीर्ष स्थान पर रहा है. आइसलैंड और स्वीडन क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे हैं.

•    न्यूजीलैंड चौथे स्थान पर है और डेनमार्क पांचवें स्थान पर है, जबकि शीर्ष दस में आयरलैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फिनलैंड और स्विटजरलैंड शामिल हैं.

•    पूर्ण लोकतंत्र की श्रेणी में महज 19 देशों को स्थान मिला है.

•    पाकिस्तान 110वें, बांग्लादेश 92वें, नेपाल 94वें और भूटान 99वें स्थान के साथ मिश्रित व्यवस्था में शामिल रहे हैं.

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