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क्या है Rafale deal जिसने मोदी सरकार की नींद उड़ा रखी है?



क्या है  Rafale deal जिसने मोदी सरकार की नींद उड़ा रखी है?





"रक्षा सौदे भारत की मजबूत सरकारो के लिए अपशगुन की तरह होते हैं.  भारत के इतिहास में सबसे मजबूत सरकार चलाई राजीव गाँधी ने , लेकिन उन्होंने  बोफोर्स तोप खरीदी और सब बर्बाद हो गया. दशको में सबसे मजबूत सरकार चला रहे हैं प्रधानमंत्री  मोदी लेकिन उन्होंने एक फाइटर जेट खरीदा Rafale  और Rafale deal को लेकर संसद में हंगामा हुआ है , बिपक्ष चाहता है की Rafale deal को लेकर एक श्वेत पत्र भारत सरकार जारी करे . परन्तु सरकार का कहना है की यह एक Defence dealहै ऐसा करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ठीक नही है.Rafale deal में आपके जानने लायक कई बातें हैं जो आपको इस ARTICAL के माध्यम से बताएँगे "
भारत के पश्चिम में पकिस्तान और पूर्व में चीन है , इसलिए भारतीये वायुसेना दोनों मोर्चो पर एक जैसी काबिलियत से लड़ने लायक क्षमता चाहती है. इसके लिय उसके पास 2020 तक 42 से 45 तक squardrons चाहिए . फाइटर जेट के एक squadron में 16 से 18 जेट होते हैं .Institute for Defence Studies and Analyses की nov 2017 की एक रिपोर्ट में कहा गया की भारत के पास केवल 34 squadrons है जिसमे से केवल 31 ही काम कर रहे हैं. इन 34 में से केवल 11 ही ऐसे हैं जो sukhoi 30 MKI के हैं . sukhoi 30 MKI अकेला नया FIGHTER JET है इसके अलावा जो भी FIGHTER JET हैं वो या तो upgrade हो रहे हैं या सेवा मुक्त होने की कगार पर हैं . कुल 14 squadron ऐसे हैं जो 2024 तक हर हाल में retire होंगे . इसके अलावा TEJAS JET अभी भी भारतीय वायु सेना की जरुरत के मुताबिक नही है और इसके उत्पादन में अभी और वक्त लगेगा . 2020 तक भारतीय वायु सेना को sukhoi 30 MKI के 3 और squadron और प्राप्त होंगे . तो तेजस को अगर गिनती में न रखा जाय तो 2020 में भारत को 3 नए squadrons मिलेगे और 14 squadrons रिटायर होंगे . तो भारतीय वायुसेना के पास बचेंगे केवल 23 squadrons जो की वायु सेना की कुल शक्ति के आधे हैं. भारतीय वायु सेना कई वर्षो से लगातार सरकार पर दवाव बना रही है की वो नए जेट खरीदे . साल 2000 मे अटलबिहारी सरकार ने ये तय किया की 126 मिराज 2000 जेट खरीदे जाएँ .बाद में इस संकल्प को बदला गया और ये कहा गया की भारत सरकार 126 Medium  Multiroll Combat Aircraft यानि MMRCA  खरीदेगी . आपको ये जानना होगा की MMRCA होता क्या ?

बात ऐसी है की वायुसेना में अलग अलग फाइटर जेट की अलग अलग भूमिका होती है . जैसे sukhoi 30 MKI
अग्रिम पंक्ति का लड़ाकू विमान है ,इसका काम है दुश्मन के जेट से हवा में लड़ना और जरुरत पड़ने पर दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला करना . कुछ फाइटर जेट ऐसे होते हैं जिनमे बिना कोई बदलाव लिए उनसे अलग अलग काम लिए जा सकते हैं. जैसे हवा से जमीन पर हमला या जानकारी एकत्रित करना आदि. ये जेट MMRCA कहलाते हैं. ऐसे ही जरुरत के लिए भारतीय वायुसेना एक और जेट पर काम कर  रही हैं जिसे FGFA
 यानी Fifth Genration Fighting Aircraft कहते हैं. इसे sukhoi और Hindustan Aeronautics Limited मिलकर बनायेंगे .
इसलिए साल 2007 में मनमोहन सरकार ने 126 MMRCA खरीदने के लिए एक RFP यानी request for proposal जारी किया . इसका मतलब ये था की दुनियाभर की जेट निर्माता कम्पनी एक ppt के जरिये भारत सरकार को ये बताएं की उनके जेट में क्या क्या खूबी है. दुनियाभर में इसे INDIAN MRCA ATTENDER के नाम से जाना गया, तब एक लाख छब्बीस हजार करोड़ की इस डील को दुनिया भर के हथियार बाजार में MOTHER OF ALL DEFENCE DEALS कहा गया. जिन कंपनियों ने ppt दिए उनके जेट को भारतीय वायु सेना ने परखा और 2011 में Eurofighter Typhoon और DASSAULT के राफेल को पसंद किया . 2012
में भारत सरकार ने DASSAULT को सबसे कम बोली लगाने वाली कम्पनी के तौर पर घोषित किया . और उससे बातचीत शुरू की. लेकिन ये बातचीत अटक गयी , बातचीत जिन मुद्दों पर अटकी थी उनमे से एक मुद्दा था technique transfer, भारत सरकार ये चाहती थी की जो 126 squadrons भारत सरकार खरीदना चाहती थी उनमे से एक squadrons फ्रांस में बने बाकि के DASSAULT भारत की Hindustan Aeronautics Limited  के साथ मिलकर बनाये.

UPA के समय डील क्यों नही हुई?
DASSAULT वही कम्पनी है जिससे 80 के दशक में मिराज 2000 खरीदे गये थे . लेकिन राफेल में मामले में DASSAULT हिन्दुस्तान में बनने बाले जेट की quality controll की जिम्मेदारी लेने से मना कर रही थी और सौदे की कीमत भी तय नही हो पा रही थी. क्युकि DASSAULT और Hindustan Aeronautics Limited  के हिसाब में फर्क आ रहा था. डील अटकी रही और 2013 में UPA के शीर्ष नेताओ पर AgustaWestland हेलीकाप्टर के घोटाले में गवन का आरोप लगा . UPA के रक्षा मंत्री ऐ के अन्तिनी वेसे भी बहुत भीरु किस्म के माने जाते थे और वो सख्त फैसले नही ले पाते थे , और उन्होंने किन्ही बजह से दुनिया की कई बड़ी हथियार निर्माता कम्पनियों को बैन कर दिया था .इसीलिए 2014 में जब तक नई सरकार आती है तब तक के लिए डील नही हो पाई .

NDA  के समय डील बदल कैसे गयी ?
मोदी सरकार के आने के बाद भी DASSAULT से बातचीत चलती रही और साल 2015 में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी फ्रांस के दौरे पर गये . फ्रांस जाकर उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद के साथ  प्रेस कांफ्रेंस की जिसमे उन्होंने अचानक ही ये एलान कर दिया की भारत सरकार फ्रांस सरकार से 36 राफेल जेट fly way कंडीशन में खरीदेगी . इसका मतलब ये हुआ की indian MRCA compition अपनी मौत मर चूका है क्युकि सरकार ने ये कहा की वो डील DASSAULT के साथ नही फ्रांस की सरकार के साथ करना चाहती है. 30 जुलाई 2015 को अधिकारिक रूप से indian MMRCA attender बापिस ले लिया गया..

तीन गुना कीमत और बिपक्ष का इल्जाम?
Rafale deal के समर्थक और विरोधी दोनों हैं. दोनों दो मुद्दों को लेकर आमने सामने हैं. उसमे से पहला है भारतीये वायु सेना को होने वाली फाइटर जेट की कमी ,असली MMRCA attender में भारतीय वायु सेना को 7 squadrons मिलने वाले थे .लेकिन मोदी सरकार के फैसले में भारतीय वायुसेना को केवल दो squadrons मिलने वाले हैं. दूसरी बहस पैसे को लेकर है जिसमे बिपक्ष का कहना है की असली MMRCA की कीमत और आज की कीमत में दो से तीन गुना फर्क है . मोदी सरकार के फैसले में कुल FIGHTER JET की कीमत 60 हजार करोड़ बताई जा रही है .बिपक्ष चाहता है की सरकार क्रमवार बताये की ये बड़ी हुई कीमत कहाँ से आई . लेकिन सरकार का कहना है की ये एक Defence deal है इसलिए ऐसा करना देशहित में सही नही है. पुरानी डील में जो 108 जेट Hindustan Aeronautics Limited  के साथ DASSAULT बनाने वाली थी उससे भारतीय कम्पनियों को इसकी तकनीक सीखने में मदद मिलती बिपक्ष की ये भी दलील है .लेकिन अब जेट फ्लाई वे कंडीशन में खरीदे जा रहे हैं, वो उड़कर हिन्दुस्तान आयेंगे तो नई तकनीक सीखने के सारे मौके हिन्दुस्तान एरोनोतिक्स के पास से ख़तम हो गये.

Hindustan Aeronautics Limited  का नुकसान और RELIANCE का फायदा ?
सरकार के करार के मुताबिक DASSAULT को मिलने वाली कुल धनराशी का 30% उसे भारत में निवेश करना होगा इसलिए उसे एक IOP  चुनना था जिसे उसने अनिल अम्बानी के रूप में चुना . अब ऐसा कहा जा रहा है और इल्जाम लगे हैं की RELIANCE समूह और प्रधानमन्त्री मोदी के बीच कुछ नजदीकी रही है . एक और बात है DASSAULT और RELIANCE के बीच साझेदारी का रास्ता भी मोदी सरकार के एक फैसले बाद साफ हुआ था . 24 जून 2017 को भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में निवेश को लेकर जो नियम बने थे उन्हें बदल दिया था .नई FDI निति में ये घोषणा की गयी थी कोई विदेश कम्पनी भारत में रक्षा क्षेत्र में 49% तक निवेश कर पायेगी और इसके लिए उसे भारत सरकार के कैबिनेट से APPROVAL की जरुरत नही पड़ेगी . DASSAULT और RELIANCE समझोता इन्ही नए नियमो के तहत हुआ है .RELIANCE रक्षा क्षेत्र में नई कम्पनी है और इसके लगने बाले नये प्रोजेक्ट में से कई मध्यप्रदेश में हैं जो की एक BJP शासित राज्य है. इसलिए बिपक्ष ने RELIANCE और BJP को लेकर सारे इल्जाम लगाये हैं. नबम्बर 2017 में RELIANCE में एक वयान जारी कर ये कहा था की उसने इस सौदे में कोई नियम नही तोडा है और अगर कोंग्रेस इल्जाम बापिस नही लेती है तो वह कोंग्रेस पार्टी पर मानहानि का मुकदमा भी कर सकती है.

बीजेपी की सफाई ?
कोंग्रेस के इल्जाम FIGHTER JET की बड़ी हुई कीमतों को लेकर हैं और भारत सरकार इससे साफ़ इनकार कर भी नही रही है .सरकार का कहना है की नए सौदे के तहत भारत को पहले ज्यादा चीज़े मिल रही हैं. DASSAULT इस बात को तय करेगी की भारत को मिलने वाले FIGHTER JET में से 75% हमेशा उड़ान भरने की स्थिति में रहे और इसके लिए वह 7 साल तक Spare part भी उपलब्ध कराएगी .बाबजूद इसके भारत सरकार इसकी असल कीमतों के लिए श्वेत पात्र लाने के मूड में नही दिख रही है. कोंग्रेस का कहना है की बीजेपी की राय Rafale deal को लेकर धुवीकृत है. कुछ लोग ऐसे भी हैं जो तठस्थ होकर इस डील को सही भी बताते है.



"भारत में रक्षा सौदे कभी भी घोटालो से अछूते नही रहे हैं लेकिन इतिहास में केवल एक बार ऐसा हुआ की रक्षा घोटालो पर  लगने वाले इल्जाम इतनी शिद्दत से लगाये गये की सरकार गिर गयी .बी पी सिंह हमेशा अपनी चुनावी रैली में राजीव गाँधी के बोफ़ोर्स घोटालो की चर्चा करते थे अब राहुल गान्धी भी उसी भूमिका को निभाने की कोशिस करते नजर आ रहे हैं. इसमें उन्हें सफलता मिलेगी या नही ये आने वाला समय ही बतायेगा." 

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