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नियत अच्छी हो तो हिम्मत मृत्यु को मात भी दे सकती है —

नियत अच्छी हो तो हिम्मत मृत्यु को मात भी दे सकती है —
Source-sahisamay.com
एक अंगरेज मित्र तथा कु. मूलर के साथ स्वामीजी मैदान में टहल रहे थे. उसी समय एक पागल सांड तेजी से उनकी ओर बढ़ने लगा. अंगरेज सज्जन भाग कर पहाड़ी के दूसरी छोर पर जा खड़े हुए. कु. मूलर भी जितना हो सका दौड़ी और घबराकर गिर पड़ीं. स्वामीजी ने उन्हें सहायता पहुंचाने का कोई और उपाय न देख खुद सांड के सामने खड़े हो गये और सोचने लगे, ह्यचलो, अंत आ ही पहुंचा.

बाद में उन्होंने बताया था कि उस समय उनका मन हिसाब करने में लगा हुआ था कि सांड उन्हें कितनी दूर फेंकेगा. लेकिन कुछ देर बाद वह ठहर गया और पीछे हटने लगा. अपने कायरतापूर्ण पलायन पर वे अंगरेज बड़े लज्जित हुए. कु. मूलर ने पूछा कि वे ऐसी खतरनाक स्थिति से सामना करने का साहस कैसे जुटा सके? स्वामीजी ने पत्थर के दो टुकड़े उठाकर उन्हें आपस में टकराते हुए कहा, खतरे और मृत्यु के समक्ष मैं स्वयं को चकमक पत्थर के समान सबल महसूस करता हूं, क्योंकि मैंने ईश्वर के चरण स्पर्श किये हैं.

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