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क्या आप जानते हैं मोहनजोदड़ो के बारे ये बातें?

Mohenjodaro हडप्‍पा सभ्‍यता (Harappan civilization) का सबसे विकसित नगर था।
इस नगर की बनावट आज के नगरों जैसी ही थी।
https://i.ytimg.com/vi/h8BJTggtwW0/maxresdefault.jpgमोहन जोदडो का अथ होता है मुर्दों का टीला ।मोहनजोदडो सिंधु सभ्यता का सबसे विकसित शहर था।
इस नगर की खोज राखालदास बनर्जी (Rakhaldas Banerjee) ने 1922 ई. मे की थी।
मोहन जोदडो सिंधु घाटी का नगर थामोहनजोदड़ो में 8 फीट गहरा, 23 फीट चौड़ा और 30 फीट लंबा कुंड भी हैं।
ऐसा माना जाता हैं कि इसका उपयोग नहाने के लिए किया जाता था।

वर्तमान में यह नगर पाकिस्‍तान में स्थित है।यहॉ की खुदाई से पता चलता है कि यहॉ के लोग खेती किया करते थे।
इस नगर के लोगों को तांबा (Copper) धातु का ज्ञान था।
दुनियांं में सूत के दो सबसे पुराने कपड़ों में से एक का नमूना यहाँ पर ही मिला हैमोहनजोदड़ो की खुुदाई से यहॉ कपडों की रंंगाई का कारखाना भी मिला था।
मोहनजोदडो के लोग अपने खाने के लिए अन्‍न इकठ्ठा किया करते थे क्‍योकि यहाॅॅ खुुदाई में बडे-बडे अन्न भंडार के प्रमाण भी मिले है।
इस नगर में बडे-बडे घर चौडी सडकेंं और बहुत सारे कुआं होने के प्रमाण मिलते हैंं।
इस नगर केे दरवाजे और खिडकियॉ सडक की आेेर न खुलकर पिछवाड़े की ओर खुलती थींं।
मोहनजोदड़ो नगर में व्‍यापार बडे स्‍तर पर होता था ।उस समय कोई भी मु्द्रा नहीं चलती थी बस चीजों की अदला-बदली से ही व्‍यापार चलता था।
इस सभ्‍यता में समुद्र के रास्‍ते दूसरे देेशों से भी व्‍यापार होता था।
मोहनजोदड़ो नगर में लगाई गई इंटें वाटर प्रूफ थी इन इंटें पर पानी और वारिश का कोई असर नहीं होता था।इस नगर केे लाेेग मूर्ति पूजा में भी विश्वास रखते थे।मोहनजोदड़ो नगर के लोगों द्वारा लिखी गई लिपि को अभी तक पढा नहींं जा सका है।
इस नगर का पतन कैसे हुुअा यह आज तक रहस्‍य बना हुआ है।

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