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65 Facts about Chhatrapati Shivaji and the Maratha Empire in Hindi - जानें छत्रपति शिवाजी और मराठा सााम्राज्‍य के बारे में

65 Facts about Chhatrapati Shivaji and the Maratha Empire in Hindi - जानें छत्रपति शिवाजी और मराठा सााम्राज्‍य के बारे में


मराठा साम्राज्‍य की स्‍थापना छत्रपति शिवाजी ने की थी।
शिवाजी का जन्‍म 19 फरवरी 1627 ई को पूना से उत्‍तर मेें स्थित जुन्‍नार नगर के समीप शिवनेर नामक स्‍थान में हुआ था ।
इनके पिता का नाम शाहजी भोंसलें तथा मॉ का नाम जीजाबाई था ।
शिवाजी के गुरू एवं संरक्षक दादाजी कोण्‍डदेव थे ।
इनके आध्‍यात्मि गुरू समर्थ स्‍वामी रामदास थे ।
शिवाजी की शादी 1640 ई में साईबाई निम्‍वालकर से हुुई थी ।
शिवाजी के पिता शाहजी ने शिवाजी को पूना की जागीर प्रदान कर स्‍वयंं बीजापुर रियासत में नौकरी कर ली ।
शिवाजी ने सर्वप्रथम बीजापुर के तोरण नामक पहाडी किले पर 1646 ई० में अधिकार कर लिया था ।

शिवाजी ने जावली के किले को मराठा सरदार चन्‍द्रराव मोरे के कब्‍जे से 25 जनवरी 1656 ई० को छीन लिया था ।
शिवाजी ने अप्रैल 1656 को रायगढ को अपनी राजधानी बनाया था ।
शिवाजी का सामना प्रथम बार् मुगलों से 1657 ई० में हुआ था ।
शिवाजी को दबाने के लिए बीजापुर के शासक ने अपने सेनापति अफजल खॉ को भेजा था ।
शिवाजी 9 मई 1666 ई० को मुगल दरबार में उपस्थित हुए थे और औरंगजेब ने उन्‍हें कैद कर लिया था ।
औरंगजेब ने शिवाजी एवं उनके पुत्र को कैद कर जयपुर भवन (आगरा) में रखा था ।
परन्‍तु वे चतुराई से मिठाई के टोकरे में बैठकर फरार हो गये थे।
शिवाजी ने सूरत को पहली 16 से 20 जनवरी 1664 ई० को तथा दूसरी बार 13 अक्‍टूबर 1670 ई० को लूटा था।
शिवाजी का राज्‍यभिषेेक 16 जून 1674 ई० को रायगढ में हुुआ था ।
इनका राज्‍यभिषेक काशी के प्रसिद्ध विद्वान श्री गंगाभट्टा् ने किया था।
शिवाजी ने छत्रपति, गौ-ब्राह्मण प्रतिपालक आद‍ि की उपाधि धारण की थी।
इन्‍होंंने रायगढ में राज्‍यभिषेक के समय छत्रपति की उपाधि धारण की थी।
शिवाजी के मंत्री मण्‍डल का नाम अष्‍ट प्रधान था ।
शिवाजी ने चौथ एवं सरदेशमुखी कर व्‍यवस्‍था लागू की थी ।
शिवाजी ने हिन्‍दूू पद पादशाही का प्रचार किया था ।शिवाजी के लडाकू जहाज को मचुआ कहा जाता था। शिवाजी गुरिल्‍ला युद्ध विशेषज्ञ थे।
शिवाजी ने दरबार में मराठी भाषा के रूप में प्रयोग किया था।
शिवाजी के अष्‍ट प्रधान मंत्रीयों में सबसे महत्‍वपूर्ण पद पेशवा का था।
शिवाजी को राजा की उपाधि औरंगजेब ने 1667 ई० मेंं दी थी।
शिवाजी की मृत्‍यु 3 अप्रैल 1680 ई० को हुई थी।
शिवाजी की मुत्‍यु के बाद उनका पुुत्र राजाराम राजसिंहासन पर बैठा था।
शिवाजी के बडे पुत्र शम्‍भाजी ने 30 जुलाई 1680 ई० को राजाराम को कैद कर रायगढ पद अधिकार कर लिया था।
शम्‍भा जी को औरंगजेब ने गिरफ्तार कर लिया और शिवाजी के पुत्र राजाराम के फिर से सिंहासन पर बैठाया राजाराम की मृत्‍यु 12 मार्च 1700 ई० को हुई। राजाराम के बाद उनका पुत्र शिवाजी द्वतीय राजगद्दी पर बैठा था ।
राजाराम की पत्‍नी तथा शिवाजी द्वतीय की माता का नाम ताराबाई था।
मराठा साम्राज्‍य की सबसे बहादुर महिला ताराबाई थी।
राजाराम की मृत्‍यु के बाद मराठा साम्राज्‍य की संरक्षिका ताराबाई बनीं ।
ख्‍ेाडा का युद्ध 1707 ई० शिवाजी द्वतीय तथा शम्‍भा जी केे पुत्र शाहूजी के बीच हुआ था।
सर रिचर्ड टेम्‍पल ने मराठा साम्राज्‍य मैग्‍नाकार्टा की संज्ञा दी थी।
शाहू के पेशवा बालाजी विश्‍वनाथ थे ।
इनकी मृत्‍यु 2 अप्रैल 1720 को हुई थीइनकी मृृत्‍यु के बाद शाहू जी के पेेशवा बालाजी विश्‍वनाथ केे पुत्र बाजीराव प्रथम बने थेे ।
शिवाजी के बाद बाजीराव प्रथम ऐसा दूसरा मराठा था. जिसे गुरल्लिा युद्ध प्रणाली को अपनाया ।
इसे लडाकू पेशवा केे नाम भी जाना था।
दिल्‍ली पर आक्रमण करने वाला प्रथम पेशवा बाजीराव प्रथम था।
जिसने 29 मार्च 1737 ई० में दिल्‍ली पर धावा वोला था।
उस समय मुगल बादशाह मुहम्‍मद शाह दिल्‍ली छोडने के लिए तैयार हो गये थेे।
बाजीराव प्रथम मस्‍तानी नामक महिला से संबध होने के कारण चर्चित रहा था।
बाजीराव प्रथम की मृत्‍यु 29 अप्रैल 1740 में हुई थी।
इसके बाद शाहू जी का पेशवा बालाजी बाजीराव बना। बालाजी बाजीराव को नानासहाव के नाम से भी जाना जाता था।
अहमदशाह अब्‍दाली का आक्रमण बालाजी बाजीराव के समय में हुआ।था।
पानीपत का तृतीय युद्ध 14 जनवरी 1761 ई० को मराठा और अहमदशाह अब्‍दाली के बीच हुआ था।
इस युद्ध में पराजय के कारण सदमे बालाजी बाजीराव की मृत्‍यु हो गई बालाजी बाजीराव की मृत्‍यु की बाद उसका दुसरा पुत्र माधव राव नारायण प्रथम पेशवा बना।
माधव राव नारायण प्रथम ने ईस्‍ट इंडिया कंपनी की पेंशन पर रह रहे मुगल बादशाह शाहआलम द्वतीय को पुन: दिल्‍ली की गद्दी पर बैठाया माधव राव नारायण प्रथम की मृृत्‍यु के बाद उसका भाई नारायण राव 1772 ई० पेशवा बना।
पेशवा नारायण राव की हत्‍या उसके चाचा रधुनाथ राव के द्वारा कर दी गई थी।
नारायण राव की मृत्‍यु के बाद उसका पुत्र माधवराव नारायण द्वतीय 1774 ई ० में पेशवा बनाअग्रेेज जेेम्‍स ग्रांट डफ ने इन्‍हें मराठों का मैकियावैली कहा था।
अंतिम पेशवा राघेेवा का पुत्र बाजीराव द्वतीय था ।
जो अंग्रेजों की सहायता से पेशवा बना थामराठों के पतन में सर्वाधिक योगदान इसी का था।
यह सहायक संधि स्‍वीकार करने वाला प्रथम मराठा सरदार थामराठा राज्‍य का द्वतीय संस्‍थापक बाजीराव प्रथम को माना जाता है।
मराठों से पूर्व गुरिल्‍ला (छापामार) युद्ध का प्रयोग मलिक अंबर ने किया था।
मराठा शासक शाहू जी के शासन काल को पेशवाओं के शासनकाल के नाम से जाना जाता है।
पेशवा का पद बालाजी विश्‍वनाथ के समय से वंशानुगत हाेे गया था।
मराठोंं द्वारा लडेे गये युद्ध
प्रथम आंग्‍ल-मराठा युद्ध (First Anglo-Maratha War) - (1775-1782)
इस युद्ध के बाद 1776 में पुरन्‍दर की संधि हुई इसके तहत कंपनी ने रधुनाथराव के सर्मथन को वापस ले लिया।
द्विताय आंग्‍ल-मराठा युद्ध (Second Anglo-Maratha War) (1803-1805)
इस युद्ध में भौसले (नागपुर) ने अंग्रेेजों को चुनौती दी इसके फलस्‍वरूप 7 सितम्‍बर 1803 ई० को देवराज की संधि हुई।
तृतीय आंग्‍ल-मराठा युद्ध (Third Anglo-Maratha War) (1816-1818)
इस युद्ध के बाद मराठा शक्ति और पेशवा के वंशानुगत पद सामाप्‍त कर दिया और मराठों का पतन हो गया ।



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